Saturday, November 06, 2010

ये कैसी राजधानी है !!

Clock Tower, Dehradun Photo-Subir
         युगीन यथार्थ की विसंगतियों के खिलाफ गत तीन दशक से निरंतर सक्रिय व जुझारू कवि चन्दन सिंह नेगी अपनी कविताओं, लेखों व जनगीतों के माध्यम से जन जागरण में लगे हैं......... उनके लेख व कवितायेँ उनकी पीड़ा, उनकी छटपटाहट को अभिव्यक्त करते हैं.........1986 में युवा कवियों के कविता संकलन 'बानगी' में प्रकाशित उनकी कवितायेँ काफी चर्चा में रही.......... 1995 में लोकतंत्र अभियान, देहरादून द्वारा प्रकाशित "उत्तराखंडी जनाकांक्षा के गीत"  में उनके वे जनगीत संकलित हैं जो उत्तराखंड आन्दोलन के दौरान सड़कों पर,पार्कों तथा नुक्कड़ नाटकों में गाये गए और वे गीत प्रत्येक आन्दोलनकारी की जुवां पर थे............समाज में व्याप्त संक्रमण के खिलाफ वे आज भी संघर्षरत है. 
यहाँ प्रस्तुत है उनका सद्ध्य प्रेषित जनगीत ;

 ये कैसी राजधानी है! ये कैसी राजधानी है!!
                                  हवा में जहर घुलता औ' जहरीला सा पानी है !!! ये कैसी राजधानी.......

शरीफों के दर्द को यहाँ कोई नहीं सुनता,
                                  यहाँ सबकी जुवां पर दबंगों की कहानी है !! ये कैसी राजधानी.........

कहाँ तो साँझ होते ही शहर में नींद सोती थी,
                                  कहाँ अब 'शाम होती है' ये कहना बेमानी है !! ये कैसी राजधानी.......

मुखौटों का शहर है ये ज़रा बच के निकलना तुम,
                                  बुढ़ापा बाल रंगता है ये कैसी जवानी है !! ये कैसी राजधानी.......

नदी नालों की बाहों में बिवशता के घरौंदे हैं,
                                  गरीबी गाँव से चलकर यहाँ होती सयानी है !! ये कैसी राजधानी......

शहर में पेड़ लीची के बहुत सहमे हुए से हैं,
                                  सुना है एक 'बिल्डर' को नयी दुनिया बसानी है !! ये कैसी राजधानी......

न चावल है, न चूना है, न बागों में बहारें है,
                                  वो देहरादून तो गम है फ़क़त रश्मे निभानी है !! ये कैसी राजधानी......

महानगरी 'कल्चर' ने सब कुछ बदल डाला,
                                  इक घन्टाघर पुराना है औ' कुछ यादें पुरानी है !! ये कैसी राजधानी.......

9 comments:

  1. हरजीत पर की गयी टिप्पणी की मार्फत आपके ब्लाग तक पहुंचा हूं
    अच्छा लगा.फ़ुर्सत से सारी सामग्री देखूंगा

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  2. बेहद ही उम्दा और सटीक रचना .
    आप के ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा.

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  3. ek bat kahna chahugi subhir ji...pls aap apne comments se word verification hata dijiye...jisse apke posts par comments jyada aaye...thanks Archana

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  4. Thanks Archana jee. Maine is or pahle dhyan naheen diya.

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  5. महानगरी 'कल्चर' ने सब कुछ बदल डाला,
    इक घन्टाघर पुराना है औ' कुछ यादें पुरानी है !! ये कैसी राजधानी.
    bबहुत सुन्दर गीत है एक एक पँक्ति आज का सच ब्याँ कर रही है। धन्यवाद।

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  6. सुन्दर शब्दों में बहुत बढ़िया भावनात्मक अभिब्यक्ति, आभार!!

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  7. भावनात्मक अभिब्यक्ति....
    Rawat ji yadi font colour blue ki jgh koi or chuntey to kavita bhali-bhanti highlight hoti or aankhon main jyada stain bhi nahi padtah.ya fir background colour bhi change kiya jaa sakta hai, overall abhi dehradun main jis gati se sarkari imarton ka nirmaan ho raha hai usey dekh lagta hai ab gairsain ko bhulna hi hoga.
    regard.......

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  8. Devendra Bist11/19/2010 2:35 PM

    Main nahin janta tha ki Shri Chandan Negi itne uchh sttar ke kavi aur itni sachii bhawna see likhe te hain.

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